| Attribute | Details |
|---|---|
| Song Name | Moh Moh Ke Dhaage |
| Singer Name | Papon |
| Lyrics Name | Varun Grover |
| Music Director | Anu Malik |
| Label | Zee Music Company |
Moh Moh Ke Dhaage Lyrics
Moh mohMoh moh ke dhaage
Ye moh-moh ke dhaage teri ungliyon se ja uljheYe moh-moh ke dhaage teri ungliyon se ja uljheKoyi toh-toh naa laage kis tarah girah ye sulajheHai rome-rome ik taaraaHai rome-rome ik taaraa jo baadlon mein se guzare
Ye moh-moh ke dhaage teri ungliyon se ja uljheKoyi toh-toh naa laage kis tarah girah ye sulajhe
Too hoga zaraa paagal tune mujko hai chunaaToo hoga zaraa paagal tune mujko hai chunaaKaise tune ankaha tune ankaha saba sunaaToo hoga zaraa paagal tune mujko hai chunaa
Too din sa hai main raatAa naa donon mil jaaen shaamon kee tarah
Ye moh-moh ke dhaage teri ungliyon se ja uljheKoyi toh-toh naa laage kis tarah girah ye sulajhe
Ke aisa beparwaah man pehle to naa thaKe aisa beparwaah man pehle to naa thaChitthiyon ko jaise mil gaya jaise ik naya sa pataKe aisa beparwaah man pehle to naa tha
Khaali raahen ham aankh munde jaaenPahuchen kaheen to bewajah
Ye moh-moh ke dhaage teri ungliyon se ja uljheKoyi toh-toh naa laage kis tarah girah ye sulajhe
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Moh Moh Ke Dhaage Lyrics In Hindi
मोह मोह
मोह मोह के धागे
ये मोह-मोह के धागे तेरी उंगलियों से जा उलझे
ये मोह-मोह के धागे तेरी उंगलियों से जा उलझे
कोई तो-तो ना लागे किस तरह गिरह ये सुलझे
है रोम-रोम इक तारा
है रोम-रोम इक तारा जो बादलों में से गुज़रे
ये मोह-मोह के धागे तेरी उंगलियों से जा उलझे
कोई तो-तो ना लागे किस तरह गिरह ये सुलझे
बहुत होगा जरा पागल तूने मुझको है चुना
बहुत होगा जरा पागल तूने मुझको है चुना
कैसे तूने अनकहा तूने अनकहा सब सुना
बहुत होगा जरा पागल तूने मुझको है चुना
बहुत दिन सा है मैं रात
आ ना डोनों मिल जायें शामों की तरह
ये मोह-मोह के धागे तेरी उंगलियों से जा उलझे
कोई तो-तो ना लागे किस तरह गिरह ये सुलझे
के ऐसा बेपरवाह मन पहले तो ना था
के ऐसा बेपरवाह मन पहले तो ना था
चिट्ठियों को जैसा मिल गया जैसा इक नया सा पता
के ऐसा बेपरवाह मन पहले तो ना था
खाली राहें हम आंख मुंडे जायें
पहुचेन कहिन तो बेवजाह
ये मोह-मोह के धागे तेरी उंगलियों से जा उलझे
कोई तो-तो ना लागे किस तरह गिरह ये सुलझे
मोह मोह के धागे
ये मोह-मोह के धागे तेरी उंगलियों से जा उलझे
ये मोह-मोह के धागे तेरी उंगलियों से जा उलझे
कोई तो-तो ना लागे किस तरह गिरह ये सुलझे
है रोम-रोम इक तारा
है रोम-रोम इक तारा जो बादलों में से गुज़रे
ये मोह-मोह के धागे तेरी उंगलियों से जा उलझे
कोई तो-तो ना लागे किस तरह गिरह ये सुलझे
बहुत होगा जरा पागल तूने मुझको है चुना
बहुत होगा जरा पागल तूने मुझको है चुना
कैसे तूने अनकहा तूने अनकहा सब सुना
बहुत होगा जरा पागल तूने मुझको है चुना
बहुत दिन सा है मैं रात
आ ना डोनों मिल जायें शामों की तरह
ये मोह-मोह के धागे तेरी उंगलियों से जा उलझे
कोई तो-तो ना लागे किस तरह गिरह ये सुलझे
के ऐसा बेपरवाह मन पहले तो ना था
के ऐसा बेपरवाह मन पहले तो ना था
चिट्ठियों को जैसा मिल गया जैसा इक नया सा पता
के ऐसा बेपरवाह मन पहले तो ना था
खाली राहें हम आंख मुंडे जायें
पहुचेन कहिन तो बेवजाह
ये मोह-मोह के धागे तेरी उंगलियों से जा उलझे
कोई तो-तो ना लागे किस तरह गिरह ये सुलझे

