विष्णु आरती Vishnu Aarti Lyrics Hindi – Anuradha Paudwal

विष्णु आरती Vishnu Aarti Lyrics Hindi – Anuradha Paudwal

जय हिन्द दोस्तों,

लो जी भक्तो, Anuradha Paudwal जी के द्वारा गाया हुवा विष्णु आरती Vishnu Aarti विडियो जो T-Series Bhakti Sagar पर मोजूत है इस भक्ति संगीत को Anuradha Paudwal ने गाया है और Arun Paudwal ने इस भक्ति संगीत में अपना म्यूजिक दिया है.

विष्णु जी पुरे विश्व पुरे ब्रह्माण्ड के पालनकार है तो अगर आप इनकी हर रोज पूजा करते है और वो भी सच्चे मन से तो विष्णु जी आपपर अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखते है और आपका पालन करते है.

Vishnu Aarti Lyrics Hindi में निचे दे रखा है तो आप वहा से लिरिक्स को पढ़े.

विष्णु आरती Vishnu Aarti Lyrics Hindi - Anuradha Paudwal
विष्णु आरती Vishnu Aarti Lyrics Hindi – Anuradha Paudwal

Songs Credits

  • एल्बम का नाम: आरतीयन
  • गायक: अनुराधा पौडवाल
  • संगीतकार: अरुण पौडवाल
  • गीतकार: पारंपरिक
  • संगीत लेबल: टी-सीरीज़

Vishnu Aarti Lyrics Hindi

अगर आप विष्णु आरती के दीवाने है और अगर आपको Vishnu Aarti Lyrics Hindi में चाहिये………… तो हम आपको Lyrics Provide करवा रहे है.

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जानो के संकट
क्षण में दूर करे
ॐ जय जगदीश हरे।

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जानो के संकट
क्षण में दूर करे
ॐ जय जगदीश हरे।

जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, सुख सम्पत्ति घर आवे
कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे।

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।

तुम बिन और न दूजा, तुम बिन और न दूजा
आस करूँ जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे।

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, पारब्रह्म परमेश्वर
तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे।

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, मैं मूरख खल कामी
कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे।

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, किस विधि मिलूँ दयामय
तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे।

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठा‌ओ, अपने हाथ उठा‌ओ
द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे।

विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा।
स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ
सन्तन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे।

श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, कहत शिवानन्द स्वामी
सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे।

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जानो के संकट
क्षण में दूर करे
ॐ जय जगदीश हरे।

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